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रुकना नहीं।

नन्ही सी आंखो मे जो बड़े बड़े ये सपने हैं,

तुझको ही पूरे करने हैं क्यूंकि ये तेरे अपने है,
राही तू आगे बढ़ते जा बस बढ़ते जा तू बढ़ते जा,
बस थकना नहीं, रुकना नहीं।

जीवन एक चुनौती है तू आ इसको स्वीकार कर,
ये बहुत बड़ा संघर्ष है आ खुलकर तू स्वीकार कर,
जो यहां तू राही जीत गया सपने भी हासिल कर लेगा,
राही तू आगे बढ़ते जा बस बढ़ते जा तू बढ़ते जा।

पला बढ़ा तू माटी में मखमल से तेरा क्या नाता,
ये चकाचौंध मृगतृष्णा है ये सभी उड़ाने नीची है,
जो चमक तेरे सपने में है उसके आगे ये फीकी है,
एक दिन क़दमों में होगी दुनिया आज जो तू अडिग रहा,
ना डर ना थक ना भटक कहीं बस लक्ष्य पर एकाग्र कर,
जा तीर निशाने लगना है जो तूने मन में ठान लिया,
राही तू आगे बढ़ते जा बस बढ़ते जा तू बढ़ते जा।

जब राही आगे बढ़ता है तो लाख मुसीबत आती है,
उन सबका तू एक ढाल बना और रण में आगे बढ़ता जा,
या तो जीत कर आएगा या वहीं अमर हो जाएगा,
जो सोचा है वो पा लेगा बस रुकना नहीं रूकना नहीं,
राही तू आगे बढ़ते जा बस बढ़ते जा तू बढ़ते जा,
बस थकना नहीं रुकना नहीं।

~ (प्रबल कुमार राजपूत)

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